मंगलवार, फ़रवरी 15, 2011

तितली उडी, उड़ जो चली...


अतुल कुशवाहा 


याद कीजिये कितने संस्करण बनाये थे शारदा के गाये इस गीत के आपने बचपन में




फिल्म जगत के श्रेष्ठतम फ़िल्मकारों में से एक थे राज कपूर, जिनकी फ़िल्मों का संगीत फ़िल्म का एक बहुत ही अहम पक्ष हुआ करती थी। क्योंकि राज कपूर को संगीत का अच्छा ज्ञान था, इसलिए वो अपनी फ़िल्म के संगीत में भी अपना मत ज़ाहिर करना नहीं भूलते थे। राज कपूर कैम्प की अगर पार्श्वगायिका का उल्लेख करें तो कुछ फ़िल्मों में आशा भोसले के गाए गीतों के अलावा उस कैम्प की प्रमुख गायिका लता जी ही हुआ करती थीं। ऐसे मे अगर राज कपूर किसी तीसरी गायिका को नायिका के प्लेबैक के लिए चुनें तो उस गायिका के लिए यह बहुत अहम बात थी। और अगर वो गायिका बिल्कुल नयी नवेली हो तो यह और भी ज़्यादा उल्लेखनीय हो जाती है। जी हाँ, राज साहब ने ऐसा किया था। ६० के दशक में एक बार राज कपूर तेहरान गए थे। वहाँ पर उनके सम्मान में एक पार्टी का आयोजन किया गया था। उन्ही दिनों तेहरान में एक तमिल लड़की थी जो पार्टियों में गानें गाया करती थी। संयोग से राज साहब की उस पार्टी में इस गायिका को गाना गाने क मौका मिला। राज साहब को उस गायिका की आवाज़ इतनी पसंद आई कि उन्होने उसे अपनी फ़िल्म में गवाने का वादा किया और बम्बई आ कर ऒडिशन देने को कहा। बस फिर क्या था, ऒडिशन भी हो गया और उस गायिका को भेज दिया गया शंकर जयकिशन के पास फ़िल्मी गायन की विधिवत तालीम हासिल करने के लिए। और आगे चलकर राज कपूर की तमाम फ़िल्मों में इस गायिका ने कई मशहूर गीत गाए, और राज साहब के बैनर के बाहर भी शंकर जयकिशन ने समय समय पर इनसे गीत गवाए। अब तक अप समझ ही गए होंगे कि ये गायिका और कोई नहीं, बल्कि शारदा हैं। कई सुपरहिट गीत गाने के बावजूद शारदा को फ़िल्म जगत ने कभी वो मुक़ाम हासिल करने नहीं दिया जिसकी वो सही मायने में हक़दार थीं। उन्ही के शब्दों में (सौजन्य: जयमाला, विविध भारती): "जब शुरु शुरु में मेरे गीत फ़िल्मों में आए तो आप सभी ने सराहा, सारे देश से मुझे प्रेरणा मिली। मेरे बहुत से गीत लोकप्रियता की चोटी पे गए, लेकिन न जाने क्यों फ़िल्मी दुनिया के कुछ लोगों ने मुझे पसंद नहीं किया। यही नहीं, उन्होने मेरी करीयर को ख़त्म करने की भी कोशिश की, कुछ हद तक शायद सफल भी हुए होंगे। पर इससे भला उन्हे क्या फ़ायदा हुआ होगा! मैं तो अलग ही ढंग से गाती थी, गाती हूँ। मेरी आवाज़ भी किसी से नहीं मिलती। और सब से बड़ी बात यह कि जब सभी लोगों ने मेरे गीतों को पसंद भी किया तो यह बात क्यों? मैं तो समझती हूँ कि ज़माने की रफ़तार के साथ साथ कला की दुनिया में भी नया रंग, नया मोड़, नया दौर आना ही चाहिए और नई दिशाएँ भी खुलनी ही चाहिए।

दोस्तों, आज शारदा जी की आवाज़ में हम सुनने जा रहे हैं फ़िल्म 'सूरज' का बड़ा ही कामयाब गीत "तितली उड़ी, उड़ जो चली"। अभी हाल ही में शारदा जी फिर एक बार विविध भारती में पधारीं थीं और 'उजाले उनकी यादों के' कार्यक्रम के लिए एक लम्बा सा इंटरव्यू रिकार्ड करवाया था। उसमें उन्होने इस गीत के बारे में विस्तार से जो बातें बताईं, आइए उन्ही पर एक नज़र डालें। "इसको generation song भी बोल सकते हैं। इसको अभी के लोग भी पसंद करते हैं। जब भी मैं प्रोग्राम्स में जाती हूँ तो लोग कहते हैं कि मेरी बच्ची ने इस गाने पे डांस किया, किसी ने मुझसे पूरा लिरिक्स मंगवाया कि मेरी बच्ची के प्रोग्राम के लिए चाहिए, so it is going on like this. Its really surprising because this is a very simple song. इसके पीछे ना ऐसा कोई डांस है, ना कोई romantic scene है, बहुत simple song है, एक घोड़ा गाड़ी में जा रही है राजकुमारी और वो गा रही है। और इस गाने में क्या है कि वो अब तक लोगों को attract कर रहा है। मैंने इस गाने के लिए बहुत research किया और पिछले कुछ सालों में मेरे दिमाग़ में आया कि शैलेन्द्र जी कुछ ना कुछ दर्शन रखते थे हर गीत में। आत्मा को हम पक्षी या तितली कहते हैं। आत्मा wants to go to source, आत्मा भगवान की तरफ़ जाना चाहती है, आकाश में जाना चाहती है। लेकिन फूल और पत्ते जो हैं माया की तरह उसको ज़मीन पर खींचना चाहते हैं। लेकिन तितली कहती है कि मुझे जाना है अपने source। "तितली उड़ी, उड़ जो चली, फूल ने कहा आजा मेरे पास, तितली कहे मैं चली आकाश"। देखा दोस्तो, शारदा जी ने इस गीत में छुपे हुए दार्शनिक पक्ष को किस तरह से ख़ुद ढ़ूंढ निकाला है। ऐसे न जाने शैलेन्द्र के लिखे और कितने गीत होंगे जिन्हे हम रोज़ गुनगुनाते हैं लेकिन उनमें छुपे दर्शन को शायद ही महसूस करते होंगे! ख़ैर, आइए सुनते हैं "तितली उड़ी" और शुभकामनाएँ देते हैं शारदा जी को एक ख़ुशनुमा ज़िंदगी के लिए। 


3 टिप्‍पणियां:

  1. Thanks for fulfill my demand . You have done a great job. Your article is interesting and informative . I love SHARADA's voice.

    Thank you again.

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  2. Interesting post.
    I would like to know about renowned women film directors and their works.
    Sorry to bother you!

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